राजा पीपा गुरु रविदास जी की ख्याति सुनकर उनके दर्शनों के लिए पहुचे
एक बार राजा पीपा गुरु रविदास जी की ख्याति सुनकर उनके दर्शनों के लिए पहुचे ओर उनसे प्रसाद मांगने लगे तो गुरु रविदास जी ने अपनी चमड़ा भिगोने वाली कुंडी से पानी प्रसाद के रूप में दिया परन्तु राजा ये देखकर घिन करने लगा और उसे लगा कि यदि मैंने यह चमड़े का गंदा पानी पिया तो मेरा तो धर्म भ्रष्ट हो जाएगा । तो राजा पीपा ने वो पानी धीरे से पीछे गिरा दिया, परंतु कुछ बूंदे उसके कुर्ते पर ही रह गयी थी, और महल पहुचते ही राजा ने वो कुर्ता धोबी के यहां पहुचा दिया । जैसे ही धोबी की लड़की ने कपड़े का दाग निकालने के लिए कोशिश की। तो कपड़े का दाग नही निकल पा रहा था, तो लड़की ने कपड़े को मुह में लिया और मुंह से कपड़े का दाग निकालने लगी तो वो कुछ बूंद उसके मुंह मे जाने से उसे तीनो लोको का ज्ञान हो गया ।
तो उसकी प्रसिद्धि सुनकर राजा पीपा उसके पास आये और उससे पूछा कि तुम्हे इतना ज्ञान कहा से मिला है।
तो उस लड़की ने कहा कि यह ज्ञान तो राजा जी मुझे आप ही की वजह से मिला है। राजा सोचने लगे और कहा कि मेरी वजह से कैसे तो लड़की ने कहा यदि आप वो गुरु रविदास जी का प्रसाद आपके कपड़े में गिराकर मेरे पास नही लाते तो आज ये सब मुझे नही मिल पाता ,। यह सुनते ही राजा को फिर बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई वह फिर गुरु रविदास जी के पास गया। और प्रसाद मांगने लगा
तो रविदास जी ने साफ बर्तन में पानी भरकर दे दिया, तो राजा बोला कि नही रविदास जी मुझे उसी कुंडी का पानी चाहिए
तो रविदास जी मुस्काये ओर बोले कि राजा वो प्रसाद तो सचखंड से आया था परंतु आपने उसका अपमान किया , और ठुकरा दिया।
अगर अब आपको वो प्रसाद चाहिए, तो सत्संग में सन्तो की सेवा करके एवं उस मालिक के नाम की सच्ची कमाई करोगे। तब जाके आपको वो प्रसाद मिल पाएगा, एवं तुम उसके लायक बन पाओगे।
फिर राजा पीपा गुरु रविदास जी का चेला बन गया, एवं अपना नाम बदलकर रामदास रख लिया, फिर राजा पीपा आगे जाके रामदास नाम से एक बहुत बड़ा सन्त बना ।।


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