सिग्नल को समझने में कंफ्यूज़ हो गए और यह सोच कर दौड़ना छोड़ दिया कि उसने रेस मुकम्मल कर ली है
जबकि 'लोग' सिर्फ़ रेस जीतना चाहते हैं, किसी से भी, कैसी भी चीटिंग करके.. #_मेरी_माँ_इसके_बारे_में_क्या_सोचेगी.... एक रेस में (तस्वीर देखें) केन्या की नुमाइंदगी करने वाले एथलीट हॉयल मुताई फाइन लाइन से सिर्फ चंद फ़ीट के फासले पर थे लेकिन वह सिग्नल को समझने में कंफ्यूज़ हो गए और यह सोच कर दौड़ना छोड़ दिया कि उसने रेस मुकम्मल कर ली है। स्पेनिश एथिलीट इवान फ्रेन्डीज़ उसके बिल्कुल पीछे थे और जो हो रहा था उसको देखते हुए हॉयल मुताई को दौड़ने का सिलसिला जारी रखने के लिए पिछे से दौड़ने के लिए चिल्लाना शुरू कर दिया। लेकिन मुताई नही समझ पाए क्योंकि वह इवान की भाषा नहीं समझ सकते थे.. तब स्पेनिश एथिलीट इवान ने उसे जीत की तरफ धकेल दिया। एक पत्रकार ने इवान से पूछा तुमने केन्याई एथिलीट को क्यों जीतने दिया? इवान ने जवाब दिया मैंने उसे जीतने नही दिया, बल्कि वो ही जीतने वाला था। पत्रकार ने फिर जोर देकर कहा..लेकिन आप जीत सकते थे! उन्होंने उसकी तरफ देखा और जवाब दिया "लेकिन मेरी फतह का क्या मकाम होगा"? इस पदक का क्या सम्मान होगा? मेरी माँ इसके बारे में क्या सोचेगी? वैल्यू (मान) नस्ल दर नस्ल मुं...