द्रौपदी कोई साधारण महिला नही थी

 भारत भूमि पर लाखों सीता मोहिनी लक्ष्मी सरस्वती दुर्गा सावित्री सुभद्रा हुई. लोगों ने खुशी से अपनी बेटियों का नाम राधा उर्मिला उर्वशी मेनका रंभा रखा. मध्यकाल में अहिल्या नाम तक रखे गए !

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लेकिन भारत के मानव इतिहास में द्रौपदी ने केवल एक बार जन्म लिया. दुबारा द्रौपदी किसी के घर में पैदा नही हुई. कारण किसी ने अपनी बेटी का नाम द्रौपदी रखा ही नही !


बुजुर्ग ऋषि मुनियों के इर्द गिर्द नाचती झूमती ठुमके लगाती, उनसे संभोग क्रिया करने वाली उर्वशी मेनका रंभा नाम आपको को हर शहर नगर में मिल जाएंगी. लेकिन किसी लड़की का नाम द्रौपदी मिलना असंभव है !


पुरुषों ने द्रौपदी का नाम मिटा दिया, लेकिन उस अकेली द्रौपदी के सवाल और उसकी दुखद हंसी को नही मिटा सके. महान दार्शनिक रजनीश के अनुसार द्रौपदी अपने युग की सबसे सुंदरतम महिला थी !


सही तो कह रहे हैं, द्रौपदी कोई साधारण महिला नही थी. क्या भला किसी असाधारण महिला के लिए कोई आपस में कट मर सकता है. द्रौपदी के मुकाबले पूरे विश्व के इतिहास में दूसरी कोई नही !


तभी पांचों भाई आपस में लड़ मर सकते थे. बीआर चोपड़ा की महाभारत अनुसार अर्जुन ने बाहर से आकर कहा की माँ देखो हम क्या लाए हैं. और माँ ने बिना देखे कहा जो भी लाए हो वह आपस में पांचों भाई बांट लो !


क्या आप लोगों को यह कहानी इतनी सरल लगती है. मुझे ब्राह्मणों की कलम पर भरोसा नही. जब बाद में माँ को पता चला होगा, की यह मामला किसी वस्तु का नही महिला का है. और वह भी अर्जुन की पत्नी है, भला किसी की पत्नी कैसे बांटी जा सकती है !


माँ कह देती भूल हो गई, मामला खत्म हो जाता. पर माँ ने जरूर कुछ तो कठिनाई महसूस की होगी. सभी बेटे पहले से शादीशुदा थे. लेकिन द्रौपदी सभी की पत्नियों से हटकर थी. कुछ अलग सबसे अलग, उसके शारीरिक आकर्षण में वह तेज था जिसके खातिर पांचों भाई आपस में कट मर सकते थे !


इसलिए माँ के आदेश पर पांचों भाइयों ने खुशी खुशी द्रौपदी के शरीर को बांट लिया. लेकिन अब सवाल उठता है क्या द्रौपदी से अनुमति ली गई थी. क्या द्रौपदी पांचों भाईयों में बटने को तैयार थी. या द्रौपदी से बिना पूछे सभी भाईयों ने बारी बारी से बलात्कार किया ?


स्त्री लूटी गयी... जीती गयी... बेची गयी... लेकिन कभी बांटी नही गयी... !


द्रौपदी जीती गयी... बांटी गयी... बेची गयी... लेकिन उसने अपना स्वाभिमान हर कीमत पर बनाए रखा. अपने पर हुए शोषण अत्याचार पर उसने पुरुषों को कटघरे में खड़ा किया. ना उसने आत्महत्या की, ना कभी उसका धरती में समाने का विचार आया !


द्रौपदी अपने दौर की महान स्त्री थी. नीच तो वह थे जिन्होंने उसे बांटा और बेचा 

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