जब फटी पुरानी साड़ी पहनकर तीन महिलाएं बाबा साहेब से मिलने आई,
एक बार नागपुर के मेयर ने बाबासाहेब के सम्मान में एक होटल के अंदर छोटी सी पार्टी रखीं।
उसी पार्टी में शामिल होने के लिए फटी पुरानी साड़ी पहनकर तीन महिलाएं आई,
और पूछने लगी कि "बाबा साहब आम्बेडकर कौन से हैं"
ऐसा सुनते ही बाबा साहब ने अपनी पहचान खुद बताई,
तभी उनमे से एक महिला ने बाबा साहेब को गेदें के फूलों से बनी हुई माला पहनाई
बाबासाहब उस महिला से लंबे थे इसलिए उन्हें कुछ झुकना पड़ा।
महिला ने कहा,
हम बहुत गरीब हैं हमारे पास होटल के अंदर घुसने के लिए एंट्री फीस के पैसे नहीं थे इसीलिए हम कई घंटे तक आपका इंतजार होटल के बाहर ही करतीं रही।
कि हम आपको देख सकें आपके दर्शन मात्र से हम धन्य हो गई
यह बात बाबासाहेब के दिल को घर कर गई,
बाबासाहेब ने उन महिलाओं से पूछा कि उन्होंने फूलों के लिए पैसे कैसे जुटाए,
उन्होंने बताया,
उन्होंने घास और लकड़ी के कई अतिरिक्त ढेर इकठ्ठे किए और फिर उन्हें बेचा,
ताकि वे इस छोटे-से उपहार का खर्च उठा सकें।
बाबासाहब की आखें नम हो गई
"भरी हुई आवाज़ में उन्होंने कहा,
माताओ जब मैं बहुत छोटा था तब मैंने अपनी माँ को खो दिया,
अपनी किसी व्यक्तिगत याददाश्त से मैं यह नहीं कह सकता कि वह कैसी थी,
लेकिन आपकी श्रद्धा और प्रेम को देखते हुए
मुझे उस ममतामयी प्रेम और करूणा का एहसास हो रहा हैं जो उन्होंने मेरे लिए महसूस की होगी,
मैं आपसे एक वादा करता हूं,
जिस प्रकार मैंने अपनी शिक्षा ग्रहण की है,
उसी प्रकार मैं अपनी पूरी कोशिश करूंगा जिससे कि आपका जीवन सम्मानजनक शांतिमय और संतोषप्रद हो,
और आपके बच्चे तरक्की करें।

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